महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों पर मराठी अनिवार्यता के फैसले का विरोध,

4 मई से आंदोलन की चेतावनी

मुंबई / अकबर खान

मुंबई, : ऑटोरिक्शा चालक-मालिक संगठन संयुक्त कृती समिति, महाराष्ट्र की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस मौके पर अध्यक्ष शशांक राव, महासचिव विलास भालेकर, शंकर साळवी (मुंबई ऑटो टैक्सी यूनियन), कार्याध्यक्ष मारुति कोंडे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए शशांक राव ने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि 1 मई 2026 से परवानाधारक ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का निर्णय अन्यायपूर्ण है l इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इस संबंध में सरकार को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही है।
नए प्रस्ताव के अनुसार, जो चालक मराठी पढ़ और लिख नहीं सकते, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। समिति का कहना है कि इससे राज्य के लाखों ऑटो-टैक्सी चालकों की आजीविका प्रभावित होगी और उनके परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि ड्राइवरों को पहले ही लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 15 वर्षों का निवास, पुलिस सत्यापन और विभिन्न शुल्कों का सामना करना पड़ता है। कई चालकों ने कर्ज लेकर वाहन खरीदे हैं और नियमों का पालन करते हुए सेवा दे रहे हैं।
संगठन ने यह आरोप भी लगाया कि अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं पर कार्रवाई किए बिना यह निर्णय लिया गया है, जो कि एग्रीगेटर कंपनियों और निजी उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है।
संयुक्त कृती समिति ने घोषणा की कि इस निर्णय के विरोध में राज्यभर के ऑटो-टैक्सी चालकों के हस्ताक्षर लेकर 28 अप्रैल 2026 तक परिवहन मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया, तो 4 मई 2026 से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
इसके साथ ही, आम नागरिकों के समर्थन के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। शशांक राव ने चेतावनी दी कि सरकार ने जल्द ही निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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